Amer fort jaipur आमेर का किला जयपुर का इतिहास हिन्दी में
Amer, originally, was the capital of the state before Jaipur. It is an old fort, built in 1592 by Raja Man Singh. This fort is also very popularly known as the Amer Palace. The Amer Fort was built in red sandstone and marble and the Maotha Lake adds a certain charm to the entire Fort.
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| Amer fort |
प्राचीन काल
में आमेर
को अम्बावती,
अमरपुरा तथा
अमरगढ़ के
नाम से
जाना जाता
था. आमेर
का किला
जयपुर से
11 किलोमीटर दूर
जयपुर का
ही एक
उपनगर है.
इसे ९६७ ईस्वी
में मीणा
राजा आलन
सिंह ने
बसाया था
और इसे
१०३७ ईस्वी में
राजपूत जाति
के कच्छावा
कुल ने
जीत लिया
था.
यह शहर
तीन ओर
से अरावली
पर्वतमाला से
घिरा हुआ
है। आमेर
के किले
चारो तरफ
उची और
मोटी दीवारे
है जो
की 12 किलोमीटर
तक फेली
हुई है,
जिनको किले
की सुरक्षा
के लिए
बनाया गया
था
ऐतिहासिक किला
1589 ई. में
बनना शरू
हुआ और
1727 ई. में
बनकर तैयार
हुआ, इसे
राजा मानसिंह,
मिर्जा जयसिंह,
सवाई जयसिंह
ने बनवाया
था. अभी
जो राजा
है उनका
नाम सवाई
पदमसिंह है.
आमेर के
महल में
जो चित्रकारी
की गयी
थी उसमे
जो रंग
काम में
लिया गया
था वह
सब्जियों, एंव
अन्य पोधो
से बनाया
गया था
जिसकी चमक
आज भी
आँखों को
चोंधिया देती
है.
आमेर के
किले के
आगे एक
झील बनायीं
गयी है
जिसका नाम
मावटा सरोवर
है, इसके
झील की
बीच में
एक बगीचा
बनाया गया
है जिसको
केशर क्यारी
बगीचा बोलते
है, क्योंकी
इस बगीचे
में केशर
उगाई जाती
थी.
इस किले
में प्रवेश
करने से
पहले दिल
आराम बाग
आता है,
तो जानते
है दिल
आराम बाग
के बारे
में –
पिछली पोस्टो मे हमने अपने जयपुर टूर के अंतर्गत जल महल की सैर की थी। और उसके बारे में विस्तार से जाना था। इस पोस्ट में हम जयपुर की ही एक और राजपूताना विरासत व सांसकृतिक धरोहर आमेर दुर्ग amer fort jaipur की सैर करेगें और उसके बारे में विस्तार से जानेगें। यह सांसकृतिक धरोहर राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर के उपनगर आमेर में स्थित है। जयपुर शहर से आमेर की दूरी 11 किलोमीटर के लगभग है। आमेर पर कछवाहा समुदाय के राजपूत शासको का शासन था। तथा उनकी राजधानी भी थी। जिसको बाद में राजा सवाई जयसिंह द्धारा स्थानांतरित कर जयपुर कर दिया गया था।
आमेर का किला अरावली पर्वत श्रृखला पर चील के टिले नामक पहाडी की चोटी पर स्थित है। पहाडी के नीचे की ओर माओटा झील है। जिसके पानी मे किले का सुंदर प्रतिबिंब दिखाई पडता है।
इस भव्य अजय आमेर का किला का निर्माण राजा मान सिंह प्रथम ने सन् 1592
ई° मे करवाया था उसके बाद राजा सवाई जय सिहं द्धारा इसमें कई योगदान व सुधार कार्य किये गये है।
आमेर के किले के मुख्य प्रवेश दूार पर पहुँचने के विए जिस मार्ग का उपयोग किया जाता है उस मार्ग पर आप हाथी या ऊँट की सवारी का भी आंनद उठा सकते है। जहां पर स्थानीय लोग कुछ चार्ज कर यह सुविधा उपलब्ध कराते है।
बाहरी परिदृश्य में यह किला मुगल शैली से प्रभावित दिखाई पडता है जबकि अंदर से यह पूर्णतया राजपूत स्थापत्य शैली में है। पर्यटक आमेर किले में एक बडें ऊँचे मेहराबदार पूर्वी द्धार से प्रवेश करते है। यह द्धार सूरजपोल द्धार कहलाता है। जबकि दक्षिण में चन्द्रपोल द्धार है। इसके सामने एक बडा सा चौक स्थित है इसे जलेब चौक कहते है। जलेब चौक से सैलानी महल की ओर बढते है तो वहा दो तरफ सिढियां दिखाई पडती है। इनमें से एक तरफ की सिढियां शिला देवी मंदिर की ओर जाती है। कहा जाता है कि शिला देवी राजाओ की कुलदेवी थी। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित प्रतिमा राजा मानसिंह द्घारा 1605
में स्थापित की गई थी। इस मंदिर के द्घार पर चांदी के कलात्मक दरवाजे लगे है। इस किले की सैर करने आने वाले ज्यादातर पर्यटक इस मंदिर में दर्शन करने जरूर जाते है।

2 Comments
Cool dude
ReplyDeleteNyc
ReplyDeleteIf you have any doubts, Please let me know